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ChangeMakers

मेरा नाम सोनिया है और मैं गाँव हसनपुर की रहने वाली हूँ। वारित्रा ने साथ काम की शुरुआत मैंने अपने गाँव हसनपुर से की। अक्सर किसी भी नए काम का पहला पड़ाव कठिन होता है लेकिन वो हमें आने वाले हालातों के लिए तैयार कर देता है। अपने परिवार मे सबसे छोटी और लाडली होने के कारण मेरे लिए कई बातें आसान जरुर की थी। लेकिन इसी कारण से मैं बहुत सी चीज़े नहीं सीख पाई जिनको करने मे मुझे डर और घबराहट होती थी। जब वारित्रा फाउंडेशन ने मेरे गाँव मे काम करना शुरू किया, तो मैंने इस संस्था के साथ जुड़ कर काम करने का फैसला किया। वारित्रा लर्निंग सेंटर में काम करते हुए मुझे नई बातें सीखने का मौका मिला। शुरुआत मे अलग अलग तरह की मुश्किलें तो आई, क्यूंकि बच्चों को पढ़ाना आसान काम नहीं था। समय के साथ बच्चो और सीखने-सिखाने की प्रक्रियों को जाना और सीखा। सरकारी स्कूल के प्रति गाँव वालो का एक अलग ही रवैया होता था। वारित्रा टीम और स्कूल अध्यापकों के साथ मिलकर गाँव वालो के साथ हमने एक सवांद की शुरुआत की । इस दौरान मेरा आत्मविश्वास स्तर और संचार कौशल मे सुधर भी हुआ। मैंने सीखना कभी नहीं छोड़ा और शिक्षा प्रणाली और विधियों को और ज़्यादा जाना। मुझे यह सीख हमेशा याद रहेगी कि काम कितना भी मुश्किल क्यों न हो, जब खुद पर विश्वास हो और टीम मे एक-साथ मिलकर काम करने का मौका मिले, तो हर काम मुमकिन है ।

सोनिया /Soniya